जैसे ही मंत्री जी की गाड़ी आकर रूकी
गाँधी के वेश में एक भिखारी ने आवाज लगाई
गाँधी के नाम पर कुछ देते जाना बाबा
बाल बच्चों कं लिए दुआएँ लेते जाना बाबा
किन्तु देख भिखारी को गांधी के वेश में
मंत्री को गुस्सा आ गया
क्रोध से उसका चेहरा तमतमा गया
बोला,
शर्म नहीं आती
तुम ये कैसा काम कर रहे हो
गांधी के नाम को बदनाम कर रहे हो
वाह मंत्री जी वाह
मैं गांधी के नाम पर मागूं तो शर्म की बात
तुम मांगो तो कोई बात नहीं
अपने कर्म देखो
किसी को नसीहत दे सको
अब तुम्हारी इतनी औकात नहीं
अरे मेरी ही नहीं
देश के हर गांधीवादी की यही कहानी है
भिखारी बन गया आज गांधी अगर
तो ये तुम्हारी ही मेहरबानी है
लक्ष्मी नारायण अग्रवाल
ज़ोरदार प्रहार
ReplyDeleteकरते रहें बार बार
कलम हो आपकी
और और धारदार