शून्य हुई संवेदना बिखरा आज समाज
दास हुई बाजार की विवेक की आवाज
विवेक की आवाज बोले अजब ही भाषा
धर्म युद्ध उसको लगे सिर्फ एक तमाशा
हर चौपाल पे दिखता दृष्य सही है आज
लक्ष्मी जी की अर्चना उल्लू जी का राज
दास हुई बाजार की विवेक की आवाज
विवेक की आवाज बोले अजब ही भाषा
धर्म युद्ध उसको लगे सिर्फ एक तमाशा
हर चौपाल पे दिखता दृष्य सही है आज
लक्ष्मी जी की अर्चना उल्लू जी का राज
लक्ष्मी नारायण अग्रवाल
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