Sunday, October 23, 2011

उल्लू जी का राज

शून्य हुई संवेदना बिखरा आज समाज


दास हुई बाजार की विवेक की आवाज

विवेक की आवाज बोले अजब ही भाषा

धर्म युद्ध उसको लगे सिर्फ एक तमाशा

हर चौपाल पे दिखता दृष्य सही है आज

लक्ष्मी जी की अर्चना उल्लू जी का राज
     
                                                           लक्ष्मी नारायण अग्रवाल

Saturday, October 1, 2011

गांधी के नाम


जैसे ही मंत्री जी की गाड़ी आकर रूकी
गाँधी के वेश में एक भिखारी ने आवाज लगाई

गाँधी के नाम पर कुछ देते जाना बाबा
बाल बच्चों कं लिए दुआएँ लेते जाना बाबा
 किन्तु देख भिखारी को गांधी के वेश में
मंत्री को गुस्सा आ गया
क्रोध से उसका चेहरा तमतमा गया
बोला,
शर्म नहीं आती
तुम ये कैसा काम कर रहे हो
गांधी के नाम को बदनाम कर रहे हो
वाह मंत्री जी वाह
मैं गांधी के नाम पर मागूं तो शर्म की बात
 तुम मांगो तो कोई बात नहीं
अपने कर्म देखो
किसी को नसीहत दे सको
अब तुम्हारी इतनी औकात नहीं
अरे मेरी ही नहीं
देश के हर गांधीवादी की यही कहानी है
भिखारी बन गया आज गांधी अगर
तो ये तुम्हारी ही मेहरबानी है
                              
                                                                                     लक्ष्मी नारायण अग्रवाल