पहले अन्ना हजारे और अब मोदी का अनशन,तब भी कांग्रेस ही ज्यादा परेशान थी अब भी कांग्रेस ही परेशान है,शायद खाओ और खिलाओं संस्कृति के लोगों को अनशन से एलर्जी है। समझ में नहीं आता मोदी का नाम आते ही क्यों लोग सिर्फ गुजरात के दंगों की बात क्यों करते हैं,साथ में कांग्रेस के गुंडों द्धारा 1984 में पॉच हजार सिख्खों के कत्ल की बात क्यों नहीं करते,1947 में छै लाख हिन्दूओं के कत्ल की बात क्यों नहीं करते,1947-48 में मुसलमान रजाकारों द्धारा हैदराबाद और उसके आसपास में दस हजार हिन्दूओं के कत्ल की बात क्यों नहीं करते,हैदराबाद में दंगों में अब तक कई हजार हिन्दूओं के कत्ल की बात क्यों नहीं करते,काश्मीर के पंडितों की बात क्यों नहीं करते।क्या इन्साफ सिर्फ मुसलमानों को मिलना चाहिए।कितनी हास्यापद बात है कि गुजरात के विकास को देखते हुए मुसलमान तो मोदी को माफ करने को तैयार है पर धर्मनिरपेक्षता के ठेकेदार हिन्दू उनको बार बार रोक रहे हैं।कांग्रेस को दस प्रतिशत मुसलमानों की भावनाओं की चिंता तो है पर नब्बे प्रतिशत उन हिन्दूओं की चिंता नहीं है जिन्होंने मोदी को बार बार चुन कर भेजा।
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