Sunday, August 5, 2012

चाणक्य या हनुमान



लोग कहते हैं विज्ञान ने बहुत प्रगति कर ली है,बड़ी असानी से पता चल जाता है कि गर्भ में लड़का है या लड़की पर मैं कहता हूं कि ये प्रगति भी कोई प्रगति है मैं तो तब मानूंगा जब विज्ञान ये बता सके कि लड़का या लड़की जो भी है बड़ा होकर क्या बनेगा।लड़का भीष्म बनेगा या अर्जुन या फिर शिखंडी ही रह जाएगा।लड़की द्रौपदी बनकर ताने मारती फिरेगी या फिर गांधारी बनकर बेटे द्धारा किसी का चीर हरण करने पर ऑखों के साथ साथ मुंह पर भी पट्टी बॉध लेगी।विज्ञान अगर ये बता सकता तो कम से कम "ऑख का अंधा नाम नयन सुख' जैसी कहावत तो नहीं बनती।महर्षि वेदव्यास तो अन्र्तयामी थे उनको पता था कि कौरव कैसे निकलने वाले हैं इसलिए पहले ही उनके नाम में दुर्जन का दु लगा दिया जैसे दुर्योधन दुस्शासन आदि आदि।पर दूसरे ऋषियों की तरह वो भी धोखा दे गए और ये ज्ञान अपने साथ ही ले गए।अगर ये ज्ञान वो आने वाली पीढ़ियों को दे जाते तो कितना अच्छा होता,मॉ बापों को नाम रखने के बाद शर्मिंदा तो नहीं होना पड़ता।अगर बाबा राम देव के माता पिता को पता होता कि वो बड़े होकर इतनी उछल कूद करेगें तो उनका नाम वानर देव,कपिल देव या हनुमान रखते रामदेव क्यों रखते।परेशानी तो ये है कि इस मामले में सरकार भी कुछ नहीं कर सकती।संविधान में ऐसा कोई कानून नहीं है कि आपका नाम ममता है तो आपमें ममता होना जरूरी है वरना जेल हो जाएगी।शायद इसी बात का फायदा बाबा उठा रहे हैं।यही नहीं हनुमान जी की तरह बाबा भेष बदलने में भी माहिर हैं।रामलीला मैदान में जब पुलिस के डंडे बरसने लगे तो स्त्री का वेष धारण करके बाबा अंर्तध्यान हो गए और सीधे हरिद्धार में प्रकट हुए।अच्छा हुआ जो स्त्री वेष धारण कर लिया लोग नार्मद तो नहीं कहेगें।

पर प्रश्न ये है कि बाबा आखिर इतनी उछल कूद किसलिए कर रहे हैं।मैंने ये प्रश्न जब अपने एकमात्र मित्र प्यारे लाल जी से किया तो भड़क गए और बोले ""अग्रवाल जी बाबा अगर विदेशों में जमा काला धन वापस देश में लाना चाहते हैं तो आपको इसमें क्या परेशानी है,ऐसा तो नहीं आपने भी स्विस बैंक में जमा कर रख्खा है।''मैं समझ गया

प्यारे लाल जी रोज सुबह योग करते हैं इसलिए बाबा की आलोचना नहीं सुनना चाहते,फिर भी मैंने हिम्मत करके कहा""मुझे परेशानी ये हे कि बाबा देश में बन रहे काले धन की बात क्यों नहीं कर रहे हैं।वो मायावती,लालू यादव,मुलायम सिंह,जगन मोहन रेड्डी के काले धन की बात क्यों नहीं कर रहे हैं?''

""दुनिया भर में लोगछत टपकने पर छेद बंद करते हैं मगर बाबा रामदेव की सोच बिलकुल उल्टी है,शायद शीर्षासन में आइडिया आया होगा,बाबा छेद बंद करने पर जोर नहीं देते,कहते हैं पानी बाल्टी में भर कर काम में ले लो।''ये सुनकर प्यारे लाल जी के उपर से बाबा के भूत की पकड़ कुछ ढीली पड़ी और बोले ""अग्रवाल जी आपकी बात में दम है पर बाबा को समझना आपके बस की बात नहीं है वो बहुत पहुंचे हुए योगी हैं जरूर कोई लम्बी योजना है।''

वेसे आम तौर पर मैं प्यारे लाल जी से बहस नहीं करता पर आज मुझ

पर भी दिग्विजय सिंह का भूत चढ़ा हुआ था,तुरन्त बोल उठा ""बाबा कितने पहुंचे हुए हैं ये तो मुझे पता नहीं पर कहॉ पहुंचना चाहते हैं इसका आभाष हो रहा है।60 साल की उम्र के अनुभव मुझे बता रहे हैं बाबा के पास नाम है नामा है इसलिए उनकी नजर दिल्ली जाने वाली राह पर है।जैसे अमिताभ बच्चन के पास नाम और नामा ज्यादा होते ही चुनाव लड़ बैठे,ये बात और है कि दिल्ली की ठंड और गर्मी दोनों ने उनकी हालत बिगाड़ दी और वो मुम्बई वापस लौट आए।बाबा भी एक बार हरिद्धार लौट आए थे लेकिन बाबा अमिताभ बच्चन नहीं हैं हठयोगी हैं।इस बार निकले तो एक जगह रूकने की गल्ती नहीं कर रहे हैं,जब डान एक जगह रूकेगा ही नहीं तो,12 हो या 24 देशों की पुलिस,हाथ कैसे लगेगा।योग से जितनी मिली उससे ज्यादा अक्ल बाबा को एक रात में पुलिस के ड़डे ने दे दी,अब वो चोरों के खिलाफ ताल नहीं ठोक रहे हैं बल्कि चोरों से ही बातचीत कर रहे हैं,बात भी सही है चोरी रोकने के उपाय चोर ही सबसे अच्छा बता सकते हैं इसलिए वो पूरे भारत में बड़े बड़े नेताओं से विदेश में जमा काले धन पर विमर्श कर रहे हैं।वैसे ये किसी को नहीं पता कि बाबा इन वार्ताओं में उपदेश दे रहे हैं या पूछ रहे हैं कि स्विस बैंक में खाता कैसे खोला जाता है धन कैसे जमा किया जाता है।

जैसे सोनिया गॉधी के पास कोई पद नहीं है वैसे ही बाबा भी कोई पद नहीं चाहते हैं,शायद चाणक्य बनना चाहते हैं जिससे देश का भी भला हो जाए,बाबा का इतिहास में नाम भी हो जाए और दिल्ली का रिमोट कंट्रोल भी हाथ में आ जाए।पर इसमें एक लोचा है।चाणक्य के पास गुरूकुल के नौजवान की समर्पित सेना थी धैर्य था जबकि बाबा के पास योग करने वाले बुढ्ढों की सेना है,धैर्य योग तो बाबा ने खुद ही नहीं सीखा और जिसमें धैर्य नहीं वो हनुमान कैसे हो सकता है।ये देखते हुए मुझे तो कोई उपयुक्त नाम नहीं सूझ रहा है आप बता सकें तो बता दीजिए।



लक्ष्मी नारायण अग्रवाल

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