लोकपाल और बुद्धिजीवी
आज प्यारे लाल जी बहुत खिन्न थे,जैसे ही मुझे दूर से देखा,शार्टकट मारकर पास आए और फट पड़े""अग्रवाल जी क्या हो गया है हमारे देश के लोगों को?"
""प्यारे लाल जी जहॉ तक मेरी जानकारी है हर आदमी परेशान है,लेकिन आपका इशारा किधर है?"
""मैं उन लोगों की बात कर रहा हूं जो कह रहे हैं कि पहले ही इतने कानून है एक लोकपाल कानू और बनाने से क्या फर्क पड़ जाएगा?"
""आप शायद देश के बुद्धिजीवियों और नेताओं की बात कर रहे हैं?"
""जो भी हैं मैं उन्ही की बात कर रहा हूं।''
""प्यारे लाल जी नेताओं के बारे में तो आप जानते हैं,पार्टी और वोट बैंक के गुलाम हैं।अगर पार्टी दिन को रात कहे तो रात कहने में जरा भी न सोचेगें न शर्म करेगें।''
""बात तो आपकी ठीक लग रही है।''
""चलिए नेताओं के बारे में तो मान लेता हूं पर ये बुद्धिजीवियों को क्या हो गया है?"
""प्यारे लाल जी बुद्धिजीवियों की विशेषता ये होती हे कि ये दोनो तरफ बोल सकते हैं।जिसकी जैसी प्रतिबद्धता होती है वैसा ही आचरण।जो देश और समाज की चिंता करते हैं वो ईमानदार बन जाते हैं पर अफसोस ये है कि ज्यादातर बिकाऊ होते हैं
""लेकिन अग्रवाल जी इनको इतनी छोटी सी बात क्यों नहीं समझ में आ रही है कि लोकपाल जैसा पहला कदम ही नहीं उठेगा तो आगे कुछ करने का रास्ता ही नहीं बनेगा।''
""ये तो भगवान ही जाने प्यारे लाल जी पर मैं तो केवल इतना ही जानता हूं कि हमारे देश में बुद्धिजीवियों का अजब ही हाल है।''
""आप कहना क्या चाहते हैं?'
""प्यारे लाल जी केवल इतना कह दीजिए कि सूरज पूर्व से निकलता है फिर देखिए 6 महीने तक बहस चलती रहेगी,हमारे देश में बहस ज्यादा होती है काम कम।''
""ये आप कैसे कह सकते हैं?"
""आप खुद ही देख लीजिए न सरकार हो संसद हो या दफ्तर हो,कहीं भी कोई भी काम समय पर नहीं होता है,फाइलों का ढेर लगा रहता है।लोकपाल बिल को देख लीजिए न 42 साल से अधर में लटका हुआ है।42 साल कम होते हैं प्यारे लाल जी?"
""ये उदाहरण तो अग्रवाल जी आपने ऐसा दे दिया कि आगे बोलने की कोई हिम्मत ही नहीं कर सकता।''
""प्यारे लाल जी ऐसै कई उदाहरण हैं।''
""जैसे कि?"
"" जैसे कि हमारे यहॉ एक नहीं कई कैदी जैसे कि अफजल गुरू,राजीव गॉधी के हत्यारे और
अन्य कई सालों से इन्तजार कर रहे हैं।न तो फॉसी होती है और न ही माफी।''
""ये तो हद है अग्रवाल जी।''
""एक और कानून से क्या फर्क पड़ेगा की बात करने वाले अधिकतर वो बुद्धिजीवी हैं जो अंग्रेजी रंग में रंगे हुए हैं जैसे मनमोहन सिंह,चिदम्बरम,कपिल सिब्बल और उनके जैसे इस देश के लाखों बुद्धिजीवी।''
""ये बात तो ठीक लगती है आपकी।''
""इन बुद्धिजीवियों पर अंग्रेजी इतनी हावी है कि जब भी कोई असली हिन्दुस्तानी कोई भी अभियान शुरू करता है तो शुरूवात ही आलोचना पहले करते हैं और सोचते बाद में हैं,ये वही लोग हैं जो अंग्रेजों की गुलामी की तारीफ करते थे।''
""आपकी ये बात तो सोचने लायक है।''
""ये वही लोग हैं जिन्होंने आजादी के बाद भारतीय भाषाओं को नहीं पनपने दिया और अंग्रेजों के जाने के बाद खुद शोषण में लग गए।''
""ये बात तो वास्तव में ध्यान देने लायक है।''
""ये वही लोग हैं प्यारे लाल जी जिन्होंने अपने बच्चों को अमरीका,इंग्लैंड और कान्वेंट में शिक्षा दिलवाई और उनको आई.ए.एस,आई.पी.एस बनाया।लाखों गॉव प्राथमिक स्कूलों के लिए तरसते रह गए मगर इनको चिंता थी तो केवल अपने बच्चों की।''
""आप तो क्रोध में आ रहे हैं अग्रवाल जी।''
प्यारे लाल जी ये वही बुद्धिजीवी हैं जिन्होंने एमरजेंसी में कहा था कि अनुशासन के लिए एमरजेंसी जरूरी है ओर आज कह रहे हें कि विकास के लिए थोड़ी भ्रष्टाचार जरूरी है।''
""आप क्या कहते हैं अग्रवाल जी?"
""प्यारे लाल जी इस देश के आदर्श राजा हरिश्चंद्र,राजा भोज,राजा विक्रमादित्य,स्वामी विवेकानन्द,राम और गॉधी जैसे लोग हैं जिन्होंने न्याय ओर मुल्यों की स्थापना की।हरिश्चंद्र का नाटक देख कर एक मोहनदास महात्मा गॉधी बन गया और गॉधी जी को पढ़ कर एक सिपाही अन्ना हजारे बन गया।बिना भ्रष्टाचार विकास कैसे होता है तो अन्ना के गॉव रालेगण सिद्धि जाकर देख लीजिए।''
""तो क्या जनलोकपाल से भ्रष्टाचार पूरी तरह समाप्त हो जाएगा?"
""प्यारे लाल जी पूरी तरह भ्रष्टाचार कानूनों से समाप्त नहीं होता,उसके लिए हमको अपने बच्चो को फिर राजा भोज,राजा हरिश्चंद्र,गॉधी ओर अन्ना हजारे को पढ़ना पड़ेगा।भ्रष्टाचार अंग्रेजों के साथ आया था और अंग्रेजी के साथ जाएगा।''
आज प्यारे लाल जी बहुत खिन्न थे,जैसे ही मुझे दूर से देखा,शार्टकट मारकर पास आए और फट पड़े""अग्रवाल जी क्या हो गया है हमारे देश के लोगों को?"
""प्यारे लाल जी जहॉ तक मेरी जानकारी है हर आदमी परेशान है,लेकिन आपका इशारा किधर है?"
""मैं उन लोगों की बात कर रहा हूं जो कह रहे हैं कि पहले ही इतने कानून है एक लोकपाल कानू और बनाने से क्या फर्क पड़ जाएगा?"
""आप शायद देश के बुद्धिजीवियों और नेताओं की बात कर रहे हैं?"
""जो भी हैं मैं उन्ही की बात कर रहा हूं।''
""प्यारे लाल जी नेताओं के बारे में तो आप जानते हैं,पार्टी और वोट बैंक के गुलाम हैं।अगर पार्टी दिन को रात कहे तो रात कहने में जरा भी न सोचेगें न शर्म करेगें।''
""बात तो आपकी ठीक लग रही है।''
""ठीक नहीं 100% सही है।वास्तविकता ये हैं कि जब वो लोग अपनी आत्मा को पार्टी के पास गिरवी रख देते हैं तभी पार्टी उनको चुनाव में टिकट देती है।जो थोड़ी बहुत बच जाती है वो सत्ता में आने के बाद अम्बानी जैसों के हाथ बेच देते हैं।''
""चलिए नेताओं के बारे में तो मान लेता हूं पर ये बुद्धिजीवियों को क्या हो गया है?"
""प्यारे लाल जी बुद्धिजीवियों की विशेषता ये होती हे कि ये दोनो तरफ बोल सकते हैं।जिसकी जैसी प्रतिबद्धता होती है वैसा ही आचरण।जो देश और समाज की चिंता करते हैं वो ईमानदार बन जाते हैं पर अफसोस ये है कि ज्यादातर बिकाऊ होते हैं
""लेकिन अग्रवाल जी इनको इतनी छोटी सी बात क्यों नहीं समझ में आ रही है कि लोकपाल जैसा पहला कदम ही नहीं उठेगा तो आगे कुछ करने का रास्ता ही नहीं बनेगा।''
""ये तो भगवान ही जाने प्यारे लाल जी पर मैं तो केवल इतना ही जानता हूं कि हमारे देश में बुद्धिजीवियों का अजब ही हाल है।''
""आप कहना क्या चाहते हैं?'
""प्यारे लाल जी केवल इतना कह दीजिए कि सूरज पूर्व से निकलता है फिर देखिए 6 महीने तक बहस चलती रहेगी,हमारे देश में बहस ज्यादा होती है काम कम।''
""ये आप कैसे कह सकते हैं?"
""आप खुद ही देख लीजिए न सरकार हो संसद हो या दफ्तर हो,कहीं भी कोई भी काम समय पर नहीं होता है,फाइलों का ढेर लगा रहता है।लोकपाल बिल को देख लीजिए न 42 साल से अधर में लटका हुआ है।42 साल कम होते हैं प्यारे लाल जी?"
""ये उदाहरण तो अग्रवाल जी आपने ऐसा दे दिया कि आगे बोलने की कोई हिम्मत ही नहीं कर सकता।''
""प्यारे लाल जी ऐसै कई उदाहरण हैं।''
""जैसे कि?"
"" जैसे कि हमारे यहॉ एक नहीं कई कैदी जैसे कि अफजल गुरू,राजीव गॉधी के हत्यारे और
अन्य कई सालों से इन्तजार कर रहे हैं।न तो फॉसी होती है और न ही माफी।''
""ये तो हद है अग्रवाल जी।''
""एक और कानून से क्या फर्क पड़ेगा की बात करने वाले अधिकतर वो बुद्धिजीवी हैं जो अंग्रेजी रंग में रंगे हुए हैं जैसे मनमोहन सिंह,चिदम्बरम,कपिल सिब्बल और उनके जैसे इस देश के लाखों बुद्धिजीवी।''
""ये बात तो ठीक लगती है आपकी।''
""इन बुद्धिजीवियों पर अंग्रेजी इतनी हावी है कि जब भी कोई असली हिन्दुस्तानी कोई भी अभियान शुरू करता है तो शुरूवात ही आलोचना पहले करते हैं और सोचते बाद में हैं,ये वही लोग हैं जो अंग्रेजों की गुलामी की तारीफ करते थे।''
""आपकी ये बात तो सोचने लायक है।''
""ये वही लोग हैं जिन्होंने आजादी के बाद भारतीय भाषाओं को नहीं पनपने दिया और अंग्रेजों के जाने के बाद खुद शोषण में लग गए।''
""ये बात तो वास्तव में ध्यान देने लायक है।''
""ये वही लोग हैं प्यारे लाल जी जिन्होंने अपने बच्चों को अमरीका,इंग्लैंड और कान्वेंट में शिक्षा दिलवाई और उनको आई.ए.एस,आई.पी.एस बनाया।लाखों गॉव प्राथमिक स्कूलों के लिए तरसते रह गए मगर इनको चिंता थी तो केवल अपने बच्चों की।''
""आप तो क्रोध में आ रहे हैं अग्रवाल जी।''
प्यारे लाल जी ये वही बुद्धिजीवी हैं जिन्होंने एमरजेंसी में कहा था कि अनुशासन के लिए एमरजेंसी जरूरी है ओर आज कह रहे हें कि विकास के लिए थोड़ी भ्रष्टाचार जरूरी है।''
""आप क्या कहते हैं अग्रवाल जी?"
""प्यारे लाल जी इस देश के आदर्श राजा हरिश्चंद्र,राजा भोज,राजा विक्रमादित्य,स्वामी विवेकानन्द,राम और गॉधी जैसे लोग हैं जिन्होंने न्याय ओर मुल्यों की स्थापना की।हरिश्चंद्र का नाटक देख कर एक मोहनदास महात्मा गॉधी बन गया और गॉधी जी को पढ़ कर एक सिपाही अन्ना हजारे बन गया।बिना भ्रष्टाचार विकास कैसे होता है तो अन्ना के गॉव रालेगण सिद्धि जाकर देख लीजिए।''
""तो क्या जनलोकपाल से भ्रष्टाचार पूरी तरह समाप्त हो जाएगा?"
""प्यारे लाल जी पूरी तरह भ्रष्टाचार कानूनों से समाप्त नहीं होता,उसके लिए हमको अपने बच्चो को फिर राजा भोज,राजा हरिश्चंद्र,गॉधी ओर अन्ना हजारे को पढ़ना पड़ेगा।भ्रष्टाचार अंग्रेजों के साथ आया था और अंग्रेजी के साथ जाएगा।''
लक्ष्मी नारायण अग्रवाल
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