अरमानों की महफ़िल है चले आओ
खुश बहुत आज या दिल है चले आओ
तुमसे मिलकर कैसा लगा है मुझको
बताना बहुत मुस्किल है चले आओ
विभाजन
हाथ तुम्हारा था खंजर तुम्हारा था
मेरे क़त्ल का वो मंजर तुम्हारा था
मेरे लहू के निशा अब भी हैं वहां
मोहल्ला तुम्हारा घर तुम्हारा था
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