आज कि कविता
१-मुझसे बात करने कि फुर्सत नहीं है अब
मेरे महबूब ने मोबाइल ले लिया है
आतंकवाद का जवाब
२ -मै भी पलट कर मार सकता हूँ तुम्हें
बिलकुल तुम्हारे जैसे हैं मेरे हाथ भी
पर नहीं
मेरा ह्रदय तुम्हारे जैसा नहीं है
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